Wednesday, July 3, 2019

What is Global better ads standard


What is Global better ads standard


आज मैंने जब अपना adsense dashboard में login किया तो मुझे एक notification show हुई, ये notification था-

ये notification आपको भी अपने adsense notification bar में जरुर show हुई होगी और आप जरुर सोचते होंगे कि ये क्या है ? क्या इसकी वजह से adsense revenue पर कोई असर पड़ेगा ? क्या हमारी adsense earning इसकी वजह से कम होगी और क्या इसकी वजह से हमारे ब्लॉग कि traffic कम होगी ? सवाल कई है पर हमारा मन एक ही चीज पर केन्द्रित है कि अगर adsense earning में इसका असर देखने को मिला तो हमारी कमाई पर इसका बुरा असर पड़ने वाला है।

आज हम इसी विषय में आपको पूरी जानकरी देने वाले है और आप इसके बारे में वो सभी बातें जानोगे जिसे अगर आप फॉलो करते हो तो आपकी adsense earning पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

Global Better Ads Standards क्या है ?



हम adsense publishers है और हमारा earning भी इसी कि वजह से होती है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि आप अपने ब्लॉग पे जो ad लगा रहे हो उसकी वजह से आपकी earning तो होती है पर क्या वो ad आपके ब्लॉग पर आपने वाले visitors को irritate कर रही है ?

आपने इसके बारे में सोचा ही नहीं होगा, वैसे भी earning अच्छी हो तो user experience पर कौन ध्यान देता है। User experience यानि कि जो visitor आपके ब्लॉग पर आ रहे है उनका अनुभव आपके ब्लॉग के प्रति कैसा है ? अगर आपके ब्लॉग visitor को आपके ब्लॉग पर लगाये गए ad कि वजह से कोई problem होती है तो इसकी वजह से user experience down होगा और होता चला जायेगा।
Overall हम blogger है और अपने ब्लॉग पर जो भी लेख प्रकाशित करते है वो सिर्फ ब्लॉग पर आने वाले visitors के लिए ही होता है। और रही बात अपने ब्लॉग पर ad लगाने कि तो हम ब्लॉग पर ad भी visitor के लिए ही लगते है।
यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि हम अपने ब्लॉग पर article के साथ-साथ विज्ञापन भी लगते है, और ये दोनों ही हमारे ब्लॉग पर आने वाले visitors के लिए ही होता है। अब ये हम पर depend करता है कि हम अपने ब्लॉग visitor को क्या दिखाना चाहते है-
  • आप अपने ब्लॉग पर कम ad लगा कर अपने ब्लॉग visitors को एक अच्छा user experience का अनुभव दिला सकते हो।
  • या फिर अपने ब्लॉग पोस्ट में इतने सरे ad लगा दो कि visitor confuse हो कर ad कर click कर दे और आपकी earning बढ़े।
आपको ये सुनिश्चित करना है कि आपके ब्लॉग पे किसका पड़ला भरी है, क्या आप अपने ब्लॉग के जरिये विज्ञापन को ज्यादा महत्त्व देते हो या फिर अपने लेख हो ? अगर आपका जवाब है विज्ञापन तो ये आपकी सबसे बड़ी नादानि हो सकती है क्यूंकि अब google भी इसके प्रति सजग हो गया है।
Google ने पिछले साल ही coalition for better ads community के साथ गठबंधन किया है। ये community यह standards decide करती है कि किन कारणों कि वजह से user experience को नुकसान पहुचता है, यानि कि अगर कोई visitor किसी वेबसाइट या ब्लॉग पर जाता है तो किन कारणों से वो निरास हो जाता है।
Coalition for better ads community सिर्फ वेबसाइट या ब्लॉग पर दिखाए गए विज्ञापनों पर focus करती है और ये बताती है कि किसी भी वेबसाइट के जरिये user experience बढ़ाने के लिए ad placement कैसा होना चाहिए, ताकि वेबसाइट पर दिखाए गए विज्ञापनों कि वजह से कोई भी visitor irritate न हो।
अब आप सोचते होंगे कि coalition for better ads community ये कैसे decide करती है कि किसी भी वेबसाइट पर ad placement कैसा होना चाहिए ? तो इस community ने 66 हजार लोगो के साथ ऑनलाइन survey किया और इस survey से ये पता चला कि ज्यादातर user को वेबसाइट पर दिखाए गए विज्ञापनों कि वजह से परेशानी होती हो, survey के दौरान ये भी पता चला कि 2017 से आज तक कुल 69% user ने ad blocker का इस्तमाल किया है।
जैसा कि आप जानते हो कि ad blocker एक ऐसा function है जो किसी भी वेबसाइट पर दिखाए जाने वाले विज्ञापन को filter करती है। अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हो कि 69% लोगों ने ad blocker का इस्तेमाल किया है तो इससे publisher और advertiser का कितना नुकसान हुआ होगा। आप इसका इन्दाजा भी नहीं लगा सकते।
Survey में ये भी पता चला कि वेबसाइट पर दिखाए जाने वाले सभी विज्ञापन user को परेसान नहीं करती और यही से Better Ads Standards कि नीव राखी गई ताकि विज्ञापन कि वजह से कोई भी user परेसान न हो और ad blocker कि जरुरत ही न पड़े।
Coalition for better ads community सिर्फ बेहतर ad placement के बारे में जानकारी देने का काम करती है जिसे आज सभी टॉप के वेबसाइट फॉलो करते है, जैस – Facebook, Google, Microsoft.. Members लिस्ट लिखने के लिए यहाँ click करे।
उदाहरण के लिए – Coalition for better ads community ad standard के मुताबी Facebook अपने website पर ऐसी कोई विज्ञापन नहीं दिखाएगी जिसकी वजह से को कोई ad blocker का इस्तेमाल करे। अब Facebook में floating ad और sticky ad नहीं show होंगे। ठीक इसी तरह google में coalition for better ads community के साथ ताल मेल मिलाते हुए ये decide किया है कि 9 जून 2019 से chrome browser में भी ad filter function को जोड़ा जायेगा।
यानि कि अगर आपके ब्लॉग पर Coalition for better ads community ad standard के against ad लगे हुए है और अगर कोई visitors chrome browser के जरिये आपके वेबसाइट पे आता है तो chrome browser आपके सभी ad को filter कर देगा।
तो दोस्तों अब आप इतना तो समझ ही गए होंगे कि Google ने ऐसा कदम क्यों उठाया है। तो अब चलिए ये जानते है कि Coalition for better ads community के मुताबिक ad standard क्या है ?

Coalition for better ads standard

Coalition for better ads standard बस यही कहना चाहता है कि आपके विज्ञापन कि वजह से user को कोई तकलीफ न हो। और user experience को बढ़ाने के लिए हमे अपने ad placement पर ध्यान देना होगा। यानि कि हमें अपने वेबसाइट में ऐसे ad placement नहीं लगाने है जिसकी वजह से user irritate हो जाये।
वेबसाइट पर आने वाले visitors 2 चीजों का experience करते है , वो है –
  1. Content Experience
  2. Ad Experience
और इन दोनों का ताल-मेल ही user experience को बढ़ावा देती है। अगर इन दोनों में ठीक ताल-मेल न हो तो user निरास होते है। ताल-मेल से हमारा मतलब ये नहीं कि user आपके वेबसाइट पर विज्ञापन को ज्यादा महत्व देते है, बल्कि वो तो सिर्फ आपके content से जानकारी लेने के लिए आये है।
जब कोई आपके वेबसाइट पर को कोई विजिटर आता है तो वो content के साथ-साथ ad experience भी करता है, और इसी के तहत Coalition for better ads community ने ad experience standard तय किया है जिसे सभी वेबसाइट को पालन करना ही होगा। तो आइये जानते है ad experience standard क्या कहता है।
जैसा कि हम सब जानते ही है कि mobile और desktop screen पर ad placement अलग-अलग होती है इसलिए इन दोनों के लिए अलग-अलग ad experience standard तय कि गई है और वो है-
  • Mobile web ad experience standard
  • Desktop web ad experience standard

Mobile web ad experience standard क्या है ?

इस standard का मूल सिधांत येही है कि जिन ad placement कि वजह से मोबाइल के जरिये किसी भी वेबसाइट पर आने वाले visitors को परेशानी न हो। वैसे भी किसी भी वेबसाइट पर almost 60% trafficमोबाइल के जरिये ही आती है और ऐसे में अगर ad placement कि वजह से user experience harm हो तो ये सबसे बड़ी वजह हो सकते है traffic loss कि।
और अगर Mobile web ad experience standard कि बता करे तो कुछ ऐसे ad placement है जिन्हें user कतई पसंद नहीं करते, वो है –
  1. Pop-up ad – वेबसाइट पर browse करने के दौरान अचानक दिखने वाले ad।
  2. Prestitial ad – अगर कोई user वेबसाइट पर browse कर रहा है उसे अचानक एक full screen ad दिखाया जाये।
  3. 30% ad density – जिस वेबसाइट पर content के मुकाबले 30% ad दिखाई गई हो।
  4. Flashing animation – Flashing animation ad को भी user पसंद नहीं करते।
  5. Poststitial ad – जिस ad को close होने में एक निश्चित समय लगती है और user को इन्तेजार करना पड़ता है।
  6. Full screen ad – अगर किसी वेबसाइट ने full स्क्रीन ad लगाया हो।
  7. Large Sticky ad
  8. Auto-playing videos with sound
अगर उपाय दिए गए 8 ad placement में से आप कोई सा भी placement use करते हो तो उसे तुरंत ही हटा लीजिये क्यूंकि अब chrome browser इन सभी ads को filter करेगा। ये तो रही मोबाइल web ad experience standard कि बात, अब बात करते है desktop ad experience standard कि.

Desktop web ad experience standard क्या है ?

वैसे तो किसी भी वेबसाइट पर सबसे ज्यादा traffic मोबाइल के जरिये ही आती है पर desktop traffic को हम अनदेखा नहीं कर सकते और Desktop web ad experience standard पर भी ध्यान देना होगा।
  • Pop-up ads
  • Auto-playing videos with sound
  • Prestitial ads with a countdown
  • Large sticky ads
देखा जाये तो मोबाइल और desktop के जितने भी ad experience standard है उनका सिर्फ एक ही मकसद है कि user experience को improve किया जाये। और यही हम भी चाहते है अगर हमारे वेबसाइट पे user experience strong हुआ तो user खुश होंगे और ज्यादा से ज्यादा समय हमारे वेबसाइट पर spend करेंगे। जिससे हमारे वेबसाइट का bounce rate भी कम होगा।

Suggestion for adsense publishers

अब आप ये जरुर सोचते होंगे कि “अरे ये सब ad placement तो हम अपने वेबसाइट पर implementही नहीं करते तो चिंता कि बात कि ?” अगर आप ऐसा सोचते हो तो जरा रुकिए। आज जितने भी ad placement standard आपने जाना वो तो आपको पहले से ही पता होगा पर – क्या आप इसे फॉलो करते हो ? क्या आपके वेबसाइट का bounce rate 60% से कम है ? इन सरे सवालों के जवाब आपको पता ही होगा।
लेकिन कुछ बातें मैं आपको जरुर कहूँगा जिसे आप फॉलो जरुर करे –
  • हर paragraph के niche एक के बाद एक ad न लगाये।
  • अपने वेबसाइट के head पे ad न लगाये। यानि कि वेबसाइट के सबसे ऊपर।
  • ऐसा ad न लगाये कि screen scroll करने के दौरान कोई उसे अनजाने में click कर दे।
  • ad और content के बीचे में कम से कम 10px का gap होना चाहिए।
  • अगर आप popup like box या फिर subscription box use करते हो तो ऐसा न करे।
  • फोटो और ad को एक साथ न लगाये।
इन सभी points को आपको फॉलो करना ही है, नहीं तो chrome browser इन सभी ad को filter कर देगा। आप समझदार ही हो आप जानते ही होगे कि आपको क्या करना है पर आप google से पूछ सकते हो कि आपने अपने वेबसाइट पर जो ad placement लगाया है उसका user experience कैसा है। चलिए इसके बारे में भी जान लेते है।

खुद के वेबसाइट का Ad Experience Report कैसे जाने ?


अपने खुद के वेबसाइट का ad experience report जानने के https://www.google.com/webmasters/tools/ad-experience-desktop-unverified?hl=en वेबसाइट में जाये और अपने वेबसाइट को सेलेक्ट करे। 24 घंटों के अन्दर google आपके वेबसाइट को review करके आपको report दे देगा। अगर आपकी वेबसाइट web ad experience standard को फॉलो करती है तो आपको report में कुछ issue नजर नहीं आएगी, लेकिन अगर ऐसा नहीं है तो आपको यहाँ report में अपने ad placement को हटाने या फिर modify करने को कहा जायेगा।


दोस्तों google हमेसा से अपने user experience को सबसे ज्यादा महत्व देता है इसलिए तो google विश्व का सबसे टॉप सर्च इंजन में गिना जाता है। और अपने user experience को और भी ज्यादा बेहतर बनाने के लिए google ने एक कदम बढ़ाया है chrome browser में ad filter ad करके।
9 जुलाई 2019 से ad function chrome browser में add होने जा रहा है और इसकी वजह से आपके ब्लॉग पे ad filter हो सकते है। आइये जानते है कि chrome ad filter कैसे काम करेगा।

Chrome ad filter कैसे कार्य करेगी ?

अगर web ad experience standard के मुताबिक आपके वेबसाइट में ad placement नहीं हुए होंगे तो इसकी वजह से user experience harm न हो इसलिए chrome browser आपके वेबसाइट से सारे ad filter कर देगा, यानि कि आपके वेबसाइट पर एक भी ad नजर नहीं आयेगी।
इस बता से आप जरुर टेंशन में आ गए होंगे। जाहिर सी बता है, अगर वेबसाइट से ad ही हट जायेंगे तो हमारी earning कैसे होगी ? और इसका जवाब है “web ad experience standard को follow करना। “
भले ही आपने अपने website पे 3 ad लगाये हो, लेकिन एक ad कि वजह से अगर user experience harm होता है तो आपके वेबसाइट से सरे 3 ad filter कर दिए जायेंगे। जिन जिन वेबसाइट को chrome browser ad filter करेगी उस website URL को अपने database से store कर लेगी और भविष्य में एक भी ad उन websites पे नहीं दिखाया जायेगा।
अगर आपके वेबसाइट के साथ ऐसा होता है तो ये बड़े दुःख कि बात होगी और इसी कि वजह से कई सरे bloggers blogging भी छोड़ देंगे। ऐसी स्तिथि में क्या करना चाहिए ? आइये जानते है।

Chrome browser ने अगर ad filter कर दिए तो क्या करे ?

अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है और आपके वेबसाइट से सरे ad filter हो रहे है तो आपको सबसे 


पहले https://www.google.com/webmasters/tools/ad-experience-desktop-unverified?hl=en वेबसाइट में जा कर check करना होगा कि इसकी वजह क्या है। इस वेबसाइट में आपको सभी report मिल जाएगी जिसकी वजह से आपके वेबसाइट पर ad नहीं show हो रही। बस आपको उसके हिसाब से अपने वेबसाइट के ad placement को बदलना होगा और review के लिए apply करना होगा।
Google chrome आपके website को review करेगी और अगर आपका website web ad experience standard को फॉलो करेगी तो ad filter आपके वेबसाइट से हटा दिया जायेगा और आपके वेबसाइट पे ad नजर आने लगेंगे।
Google chrome को आपके वेबसाइट को review करने में 30 दिनों का समय भी लग सकता है।
तो दोस्तों अब आप पूरी तरह समझ गए होंगे कि user experience को बढ़ावा देने के लिए google ने जो कदम उठाया है वो क्या है और हमें पूरी उम्मीद है कि आपका वेबसाइट web ad experience standard को जरुर फॉलो करता होगा और अगर ऐसा नहीं है तो आपको इसे फॉलो करना ही होगा।

क्या web ad experience standard कि वजह से traffic पर बुरा असर पड़ेगा ?

इसके बारे में अभी कुछ पक्की जानकारी नहीं है लेकिन हाँ, ad filter कि वजह से अगर आपके वेबसाइट पर ad filter होते है तो आपके वेबसाइट पर ad नहीं show होंगे जिसकी वजह से आपके वेबसाइट का loading speed improve होगा और आपके content लोगों तक quickly serve होंगे।
लेकिन इसका एक दूसरा भी पहलु है, अगर आपका वेबसाइट से सरे ad फ़िल्टर हो गए है तो आप इसकी वजह से जरुर demotivate हो जाओगे और ये कारण आपके blogging career पर बुरा सर डालेगा, और कई blogger blogging भी छोड़ देंगे।

हम ये नहीं चाहते कि आप अपने वेबसाइट से demotivate हो और हम यही उम्मीद करते है कि आप हमेसा internet में रहो और अपने अनुभव को लोगों के साथ share करो। HAPPY BLOGGING

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