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Saturday, 12 October 2019

What is Antiradiation Chip : Report

There is no one any chip to control your mobiles Radiation . These are all totally Fake products and production of these products for just income. So beware all these frauds 

नई दिल्ली: 
सोशल मीडिया पर दावा है कि मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन इतना खतरनाक है कि इससे ब्रेन कैंसर से लेकर दिल की बीमारी तक हो सकती है. इस बार सोशल मीडिया पर रेडिएशन से निपटने का उपाय बताया जा रहा है. दावा कुछ ऐसा है कि फोन में एक एंटी रेडिएशन चिप लगाकर आप मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन से खुद को बचा सकते हैं.


एक्सपर्ट ने बताई बेहद अहम बात

एक्सपर्ट के मुताबिक हमारे मोबाइल फोन में दो तरह के रेडिएशन होते हैं. एक माइक्रोवेव रेडिएशन और दूसरा हीटिंग रेडिएशन होता है. माइक्रोवेव रेडिएशन वो रेडिएशन है जिससे मोबाइल फोन मोबाइल टावर से मिलने वाले सिग्नल से कनेक्ट करता है.

हीटिंग रेडिएशन फोन आने पर या फोन के इस्तेमाल के वक्त मोबाइल के गर्म होने पर पैदा होता है. ऐसे में माइक्रोवेव रेडिएशन को तो रोकना मुमकिन नहीं है क्योंकि उसको रोकने से फोन से सिग्नल ही गायब हो जाएगा. फोन के इस्तेमाल से जो हीटिंग रेडिएशन होता है उसे कम किया जा सकता है. वैज्ञानिक तौर ऐसी किसी चिप का कोई आधार नहीं है. जो किसी भी तरह के रेडिएशन को रोक सके.

प्रोफेसर सत्यब्रत जीत के बाद हमने इंडियन सेलुलर एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट पंकज महेंद्रू से संपर्क किया. पंकज महेंद्रू ने बताया कि इस तरह का कोई भी प्रोडक्ट मार्केट में बिना अंतरराष्ट्रीय मानक के स्तर पर सर्टिफिकेट लिए नहीं आ सकता. रेडिएशन की टेस्टिंग बड़े ही सॉफिस्टीकेटेड यंत्र से होती है. ऐसे किसी यंत्र से रेडिएशन की जांच नहीं की जा सकती. टेलीकॉम मंत्रालय की सरकारी संस्था को ही रेडिएशन जांच करने का अधिकार है. ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं है जो पहले से कम रेडिएशन के लेवल को और कम कर दे. इस वीडियो में कोई वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्य नहीं है.

ये है मोबाइल रेडिएशन का पूरा गणित

SAR लेवल मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन को नापने का तरीका होता है. हर मोबाइल फोन का एक स्पेसिफिक एबजॉर्बेशन रेट होता है. यानि फोन कितना रेडिएशन झेल सकता है जो शरीर के लिए हानिकारक नहीं है.
दुनिया भर में जो SAR लेवल 2 वाट पर 10 ग्राम ऑफ टिश्यू है. भारत का जो स्टैंडर्ड 1.6 वॉट पर 1 ग्राम ऑफ टिश्यू है. ये बाकी दुनिया से 1000 फीसदी से भी ज्यादा कम है.
इसका मतलब ये कि भारत में किसी भी मोबाइल फोन पर वन ग्राम ऑफ टिश्यू पर 1.6 वॉट से ज्यादा रेडिएशन नहीं होना चाहिए. भारत चाहता तो अंतर्राष्ट्रीय मानक के हिसाब से 10 ग्राम ऑफ टिश्यू पर 2 वाट रख सकता था. भारत ने रेडिएशन लेवल एक हजार गुना कम रखा ताकि लोग ज्यादा सुरक्षित रहें.

कैसे नापा जाता है मोबाइल रेडिएशन

फोन में रेडिएशन को नापने के लिए आपको किसी मीटर की जरूरत नहीं है. आप खुद अपने फोन पर कुछ नंबर डायल करके ये पता लगा सकते हैं. अपने मोबाइल फोन से *#07# डायल करें. ये डायल करते ही आपके फोन का SAR लेवल दिखाएगा. यानि आपके फोन से इतना रेडिएशन निकलता है.
देश में रेडिएशन का जो मानक रखा गया है ये उससे काफी कम है जिसका साफ मतलब है कि इसका आपके शरीर को कोई नुकसान नहीं होगा. हमारी पड़ताल में मोबाइल रेडिएशन रोकने वाली चिप का दावा झूठा साबित हुआ है.


So we can understand all these Antiradiation Chips are totally Fake  like , modicare etc . All things

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